Saturday, 6 June 2009

Each Day That Passes By




There are folks and there are Folks...

Folks whom I miss desperately, like an ache in my bones.
Like a throb in my heart, who stay with me like Raindrops....
Memories, but still soft, moist, refreshing, cool.
They are the ones who fill my thirst for companionship.

These folks are the ones who make me who I am.
Parents, teachers, friends, family (ok not all!),
Neighbours one or two.
A colleague here, an accidental acquaintance there..
Life progresses, and you move on
But these FOLKS are the glue in life..
Who keep you intact.
When everything else falls apart.

Wednesday, 3 June 2009

Why Do I Fake It??


Before anyone gets ideas....
Why do I fake Anger, Sadness, Enthusiasm, Interest, Indifference, Love, Hate, Boredom,
Any obvious feelings,
For People Who Do Not Matter?
And why do I do the same, with PEOPLE WHO MATTER?

Tuesday, 2 June 2009

अक्षर कभी यूँ टूट पड़ते हैं


अक्षर कभी यूँ टूट पड़ते हैं
कि उल्टे पुल्टे, मुडे टुडे
कागज़ पर छलक ही पड़ेंगे, टपक ही पड़ेंगे
अक्षर कभी यूँ बाढ बन कर पड़ते हैं,
कि सारे विचार, सारा वजूद बहा ले जायेंगे
पत्तियों, डालियों, घास के घर कि तरह...
कभी कहना चाहता है बहुत कुछ यह दिल
कभी सुनना चाहता है, बहुत कुछ यह दिल
पर अक्षर कहाँ सुनना चाहते हैं
बस बरस पड़ते हैं, ओलों को तरह
और कहा सुना, सब उनके शोर में,
लुप्त हो जाता है।

विचारों का यह झुरमुट
कभी यह आम के वृक्ष कि छाँव बन,
कभी यह पीपल का चौबारा बन ,
कभी यह रात के जंगल कि तरह,
लहराता है, सरसराता है
और विचारों का विचलित
मन सहम जाता है।

विचारों का यह झुरमुट
कभी कभी सहरा भी बन जाता है
जहाँ सायं सायं लू चलती है और कभी
हिमालय की वादियाँ बन जाता है
जहाँ हर शब्द
एक शीतल झोंका सा लगता है
जो गालों को सहलाता है,
मन को खूब भाता है
जहाँ तन कि तड़पन को राहत मिलती है
और सांसों का रेला फिर चल जाता है।

विचारों का यह झुरमुट शायद
मेरा हिस्सा बन गया है
दिल की धड़कन, रगों का खून बन गया है
जो हर कदम पर पूछता है मुझसे सवाल
और हर पल देता है मुझे जवाब
यह तो मेरे वजूद, मेरे अस्तित्व
का अंश नहीं, सरमाया बन गया है।
अक्षर बन जाते हैं वाक्य
वाक्य बन जाते हैं विचार
विचार बन गए हैं धड़कन,
धडकनों के साथ अब यह शब्द,
मेरे जीने का कारण बन गए हैं।